नई शिक्षा नीति 2023- Education Policy PDF, नई एजुकेशन पॉलिसी

भारत की नई शिक्षा नीति | नई एजुकेशन पॉलिसी पीडीऍफ़ | New National Education Policy Pdf Download | What is New Education Policy 2023

इसरो के प्रमुख डॉक्टर कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता के दौरान नेशनल एजुकेशन पॉलिसी की शुरुआत की गई। इस पॉलिसी के माध्यम से स्कूल व कॉलेज स्तर शिक्षा प्रणाली में बदलाव किए गए हैं जिसके माध्यम से अब भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाया जाएगा। तो दोस्तों आज हम आपको अपने इस लेख के माध्यम नई शिक्षा नीति 2023 से जुड़ी संपूर्ण जानकारी प्रदान करने जा रहे हैं जैसे उद्देश्य, लाभ, विशेषताएं, पात्रता एवं अन्य सुविधाएं। यदि आप भी National Education Policy से संबंधित जानकारी प्राप्त करना चाहते हैं तो आप से निवेदन है कि हमारे इस लेख को विस्तार पूर्वक पढ़ें।

Table of Contents

National Education Policy (NEP)

जैसे कि हम सब जानते हैं कि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के अंतर्गत ही स्कूल व कॉलेज में होने वाली शिक्षा की नीति बनाई जाती है ऐसे में भारत सरकार द्वारा एक National Education Policy को लांच किया गया है। इस पॉलिसी को इसरो के प्रमुख डॉक्टर कस्तूरीरंगन के अध्यक्षता मैं तैयार किया गया है। इस बदलाव के तहत 2030 तक स्कूल शिक्षा में 100% जी आई आर के साथ पूर्व विद्यालय से माध्यमिक विद्यालय तक शिक्षा का सार्वभौमीकरण किया जाएगा। जैसे कि हम सब जानते हैं कि पहले 10+2 का पैटर्न फॉलो किया जाता था तथा इस को बदल के नई शिक्षा नीति के तहत अब 5+3+3+4 का पैटर्न फॉलो किया जाएगा। 

National Education Policy
National Education Policy

नई शिक्षा नीति के तहत की गई सार्थक योजना की शुरुआत

देश में शिक्षा के स्तर को ओर अधिक सुधारने के लिए सरकार सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं। जिसके लिए हाल ही में National Education Policy को शुरू किया गया है। अब शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल निशांत द्वारा गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के माध्यम से छात्रों एवं शिक्षकों का सम्रग विकास करने के लिए सार्थक योजना आरंभ करने जा रही है। सार्थक योजना को सभी पक्षकारों (राज्य, केंद्र शासित प्रदेश आदि) से विचार-विमर्श एवं सुझाव प्राप्त करने के बाद ही तैयार किया गया है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा सभी  हितधारकों से इस योजना पर सुझाव मांगे गए थे।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा सुझाव मांगने पर लगभग 7177 सुझाव प्राप्त हुए थे। नई शिक्षा नीति में शिक्षा नीति की सिफारिशों के 297 कार्यों को एक साथ शामिल किया गया है। इन कार्यों के लिए जिम्मेदार एजेंसी एवं समय सीमा भी निर्धारित की गई है। साथ ही इस योजना के तहत कार्यों के लिए 304 परिमाण भी निर्धारित किए गए हैं।

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सार्थक योजना से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां

  • नई शिक्षा नीति के‌ लिए सार्थक योजना के माध्यम से 1 वर्ष की कार्यान्वयन योजना का निर्माण किया जाएगा।
  • इस योजना में नई शिक्षा नीति के कार्यो और गतिविधियों को बेहतर तरीके से परिभाषित भी किया जाएगा।
  • सभी केंद्र शासित प्रदेशों एवं राज्यों को इस योजना के माध्यम से नई शिक्षा नीति को समझाने में मदद मिलेगी।
  • सार्थक योजना में शिक्षा नीति के लक्ष्य, परिमाण एवं समय सीमा भी उपलब्ध है।
  • स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा सार्थक योजना की रूपरेखा को तैयार किया गया है।
  • सार्थक योजना को देश के 75 वर्ष पूरे होने की अवसर पर अमृत महोत्सव के दौरान जारी किया जाएगा।
  • यह योजना संवादात्मक लचीली एवं समावेशी है।
  • सार्थक योजना की खास बात यह है कि राज्य नई शिक्षा नीति में अपनी जरूरतों के हिसाब से बदलाव भी कर सकते हैं।

नई शिक्षा नीति के मुख्य तथ्य (Overview)

आर्टिकल का विषयNational Education Policy
किसके द्वारा लांच की गई भारत सरकार द्वारा
विभागमानव संसाधन मंत्रालय 
लाभार्थीभारत के नागरिक 
आर्टिकल का उद्देश्य शिक्षा का सार्वभौमीकरण करना है तथा भारत को वैश्विक ज्ञान महाशक्ति बनाना है।
आरंभ तिथि2020
स्कीम  उपलब्धताअभी उपलब्ध है
 लाभबच्चों के अंदर मनोबल तथा सशक्तिकरण बढ़ाना
 अधिकारिक वेबसाइट www.mhrd.gov.in

नई शिक्षा नीति के तहत कालक्रम

सामग्रीतिथि
परामर्श प्रक्रिया शुरू होने की तिथिजनवरी सन् 2015 से लेकर अक्टूबर सन् 2015
सुझाव आमंत्रित करने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्री की भारत सरकार के मंत्रालय के साथ उच्च स्तरीय मीटिंग14 फरवरी सन् 2015
राज्य स्तरीय मंत्रालय एवं सचिवों के साथ परामर्श मीटिंग2 मार्च सन् 2015
नई शिक्षा नीति का सुचारू रूप से संचालन करने के लिए स्वर्गीय श्री टीएसआर सुभ्रमण्यम की अध्यक्षता में एक समिति का गठन31 अक्टूबर सन् 2015
गठित समिति ने स्वर्गीय श्री टीएसआर की अध्यक्षता में अपनी रिपोर्ट मंत्रालय को सौंपी27 मई सन् 2016  
नई शिक्षा नीति के विकास के लिए स्वर्गीय श्री टीएसआर की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण सिफारिशें
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2016 के मसौदे के लिए मंत्रालय द्वारा कुछ इनपुट तैयार किए गएजून सन् 2016  
NCP के विकास के लिए समिति की रिपोर्ट एवं राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2016 के मसौदे के कुछ इनपुट संसद के दोनों सदनों में प्रस्तुत किए गए4 अगस्त 2016 एवं 8 अगस्त 2016
राज्यसभा के नियम 176 के तहत एक छोटी अवधि की चर्चा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के लिए हुई10 अगस्त सन् 2016  
संसद सदस्यों के साथ मिलकर शिक्षा संवाद10 नवंबर सन् 2016
डॉ के कस्तूरीरंगन की अध्यक्षता में मसौदा शिक्षा नीति के लिए एक समिति का गठन एवं विस्तार के आदेश24 जून सन् 2017
ड्राफ्ट नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2019 की MHRD की वेबसाइट पर हितधारकों से सुझाव प्राप्त करने हेतु अपलोड किया गया31 मई सन् 2019
मसौदा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2019 पर सुझाव आमंत्रित किए गए
स्कूल विभाग के राज्य शिक्षा सचिवों के साथ बैठक आयोजित15 सन् अगस्त 2019
स्कूल विभाग के राज्य शिक्षा सचिवों के साथ मिलकर एक बैठक की गई आयोजित9 जुलाई सन् 2019
माननीय सांसदों के साथ मिलकर किए गए शिक्षा संवाद31 जुलाई 2019 1 अगस्त 2019, 2 अगस्त 2019
उच्चतर एवं तकनीकी विभाग के राज्य शिक्षा सचिवों के साथ बैठक का आयोजन8 अगस्त सन् 2019
राष्ट्रीय शिक्षा नीति पर सीएबीई की विशेष बैठक का आयोजन21 सितंबर सन् 2019
मानवीय संसाधन विकास संबंधी संसदीय स्थाई समिति की बैठक7 नवंबर सन् 2019

नई शिक्षा नीति के अंतर्गत लाइव डैशबोर्ड

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के सफलतापूर्वक कार्यान्वयन के लिए एक लाइव डैशबोर्ड आरंभ करने का निर्णय लिया गया है। कार्यान्वयन प्रक्रिया की पूरी निगरानी इस लाइव डैशबोर्ड के द्वारा की जाएगी। ‌ कॉलेज एवं विश्वविद्यालय द्वारा नीतिगत बदलाव को लागू करने पर सरकार द्वारा जोर दिया जा रहा है। इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा 118 कार्य शामिल किए गए हैं। जैसे स्नातक एवं स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम, रीजनल लैंग्वेज एजुकेशन, यूनिवर्सिटी डिग्री, क्रेडिट बैंक सिस्टम आदि। 

  • इस योजना के अंतर्गत सरकार द्वारा टास्क फोर्स का गठन किया गया है। 
  • इसके अलावा मासिक एवं त्रैमासिक आधार पर डैशबोर्ड की निगरानी शिक्षा मंत्री द्वारा की जाएगी।

एनईपी के अंतर्गत इंप्लीमेंटेशन एंड रिव्यू कमिटी

नई शिक्षा नीति के अंतर्गत मंत्रालय द्वारा इंप्लीमेंटेशन और रिव्यू कमेटी का गठन किया गया है। और यह गठन हायर एजुकेशन डिपार्टमेंट द्वारा किया जाएगा। इस कमेटी के माध्यम से पॉलिसी की सफलतापूर्वक जांच की जाएगी। इसके साथ-साथ क्रेडिट बैंक प्रणाली एवं आईआईटी के लिए एक टास्क फोर्स का गठन किया जाएगा। यदि नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के कार्यान्वयन में कोई भी प्रकार की कमी पेशी की गई तो राज्य एवं जिला स्तर के अधिकारियों को जवाब देना होगा।

एनसीसी कोर्स को मिली UGC और AICTE द्वारा मंजूरी

नई शिक्षा नीति को बढ़ावा देने ‌ के लिए यूजीसी और एआईसीटीई द्वारा विश्वविद्यालय के एनसीसी कोर्स को मंजूरी प्रदान कर दी गई। इस कोर्स के माध्यम से विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों के अंतर्गत देशभक्ति की भावना पैदा की जाएगी एवं उन्हें देश भावना के प्रति प्रोत्साहित किया जाएगा। एनसीसी निदेशालय द्वारा सभी विश्वविद्यालय के सामान्य वैकल्पिक क्रेडिट पाठ्यक्रम के बारे में जानकारी प्रदान की गई। उसके साथ-साथ यह भी बताया गया कि जल्द ही कई विश्वविद्यालयों द्वारा एनसीसी को एक वैकल्पिक विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। जिसमें विद्यार्थियों को एनसीसी प्रशिक्षण के लिए क्रेडिट बी और सी प्रमाण पत्र मोहिया कराया जाएगा और साथ-साथ वह रोजगार की सुविधा भी प्राप्त कर सकेंगे।

NYNEP प्लेटफार्म का किया गया शुभारंभ

हाल हीं में केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री रमेश पोखरियाल निशंक जी के द्वारा एनसीटीई प्लेटफार्म पर NYNEP 2020 को आरंभ किया गया है। 1 अप्रैल 2021 से 15 मई 2021 तक यह प्लेटफॉर्म कार्यशील रहेगा। इस प्लेटफार्म के द्वारा नेशनल प्रोफेशनल स्टैंडर्ड फॉर टीचर्स एवं नेशनल मिशन फॉर मेंटरिंग प्रोग्राम मेंबरशिप के विकास हेतु ड्राफ्ट तैयार किए जाएंगे। सभी हितधारकों से ड्राफ्ट के लिए सुझाव इनपुट एवं सदस्यता भी आमंत्रित की जाएगी। इन हितधारकों में शिक्षक, शिक्षाविंद, शिक्षा पेशेवर एवं अन्य शिक्षा से जुड़े हितधारकों को जोड़ा गया है। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से नई शिक्षा नीति के दो प्रमुख सिफारिशों के ऊपर दस्तावेज तैयार करने में सहायता मिलेगी। यह प्लेटफार्म एक तरह से डिजिटल परामर्श के रूप में कार्य करेगा।

NYNEP 2020 प्लेटफार्म के माध्यम से राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के दो प्रमुख सिफारिशों के दस्तावेज तैयार करने के लिए अनेक व्यक्तियों एवं संगठनों से परामर्श किया जाएगा। इसके बाद प्राप्त सुझावों को एकत्रित करके उनकी समीक्षा की जाएगी एवं उसके बाद ड्राफ्ट तैयार करके ड्राफ्ट को सार्वजनिक किया जाएगा। ताकि इसकी समीक्षा की जा सके और प्राप्त हुए सुझाव एवं टिप्पणियों के आधार पर एक अंतिम ड्राफ्ट भी तैयार किया जाएगा।

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के माध्यम से छात्रों के स्कूल बैग का वजन एवं होमवर्क किया जाएगा कम

अब NCP के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में कई ओर नए फैसले लिए गए हैं। जिससे देश के बच्चे शिक्षा की ओर आकर्षित हो सकें। इस योजना के तहत अब यह फैसला लिया गया है कि 1 से लेकर 10वीं कक्षा तक के छात्रों के बैग का वजन उनके वजन का 10% ही होना चाहिए। नई शिक्षा नीति 2022 के तहत बच्चों को व्हील कैरियर बैग लाने पर भी रोक लगाई जाएगी। क्योंकि इस बैग के बच्चों को चोट लगने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा सभी विद्यालयों में एक डिजिटल वेइंग मशीन रखी जाएगी। इस मशीन के द्वारा स्कूल बैग का वजन मॉनिटर किया जाएगा। इस पॉलिसी के डॉक्यूमेंट में यह भी है कि स्कूल बैग हल्का एवं प्रॉपर कंपार्टमेंट्स वाला होना चाहिए। बच्चों के बैंग में कंधे पर फिट होने वाले दो पदेड एडजेस्टेबल स्ट्रप्स होने चाहिए। जिससे बच्चों को बैग टांगने में आसानी हो सके।

नई शिक्षा नीति के कुछ प्रमुख सिद्धांत

  • शिक्षा को लचीला बनाना
  • सभी बच्चों की क्षमता की पहचान एवं क्षमता का विकास करना।
  • साक्षरता और संख्यामकता के ज्ञान को बच्चों के तहत विकसित करना
  • बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को विकसित करना
  • सार्वजनिक शिक्षा प्रणाली में निवेश करना
  • भारतीय संस्कृति से बच्चों को जोड़ना
  • उत्कृष्ट स्तर पर शोध करना
  • शिक्षा नीतियों में पारदर्शिता लाना
  • शिक्षा नीतियों में पारदर्शिता लाना
  • बच्चों को सुशासन का ज्ञान प्रदान करना एवं उनका सशक्तिकरण करना
  • तकनीकी यथासंभव उपयोग पर अधिक जोर देना
  • अनेक प्रकार की भाषाएं सिखाना
  • बच्चों की सोच को रचनात्मक बनाना और तार्किक करना
  • मूल्यांकन पर जोर देना

National Education Policy के तहत प्रारंभिक शिक्षा के कुछ आवश्यक घटक

प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल:

नई शिक्षा नीति के तहत 6 वर्ष की आयु तक के बच्चों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित करने पर प्रावधान रखा गया है। क्योंकि एक शोध के अनुसार बच्चों के दिमाग का 85% विकास 6 वर्ष की आयु तक हो जाता है। इस दशा में बच्चों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए आरंभिक 6 वर्ष अधिक महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए अब इस योजना के माध्यम से6 वर्ष की आयु तक के बच्चों पर खास ध्यान दिया जाएगा। ताकि इन बच्चों का संपूर्ण रूप से विकास हो सके।

ड्रॉपआउट रेट कम करना एवं सार्वभौमिक पहुंच सुनिश्चित करना

इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य ड्रॉप आउट रेट कम करना है। इस योजना के द्वारा शिक्षा प्रणाली को लचीला बनाया जाएगा। ताकि बच्चे आसानी से शिक्षा प्राप्त करने में सक्षम हो पाए और ड्रॉपआउट रेट में कमी आए। नेशनल एजुकेशन पॉलिसी 2023 के तहत चुनाव के विकल्प को लचीला बनाया जाएगा। जिससे बच्चे उन्हीं विषयों का चयन कर सके जिनका वह अध्ययन करना चाहते हैं।

बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक:

बच्चों में बुनियादी साक्षरता और संख्यात्मक ज्ञान को विकसित करने के लिए निपुण योजना का संचालन किया जाएगा। निपुण योजना का पूरा नाम नेशनल इनीशिएटिव फॉर प्रोफिशिएंसी इन रीडिंग विद अंडरस्टैंडिंग एंड न्यूमरसी है। इस योजना के द्वारा छात्रों को तीसरी कक्षा के आखिर तक आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मकता का ज्ञान प्रदान किया जाएगा। ताकि वह पढ़ने, लिखने और अन्य गणित को सीखने की क्षमता प्राप्त कर सके

5+3+3+4 का स्कूली पाठ्यक्रम:

इस घटक के तहत शिक्षा की रूपरेखा को 5+3+3+4 के स्कूली पाठ्यक्रम में विकसित किया जाएगा। जिसमें 3 से लेकर 8, 8 से लेकर 11, 11 से लेकर 14 एवं 14 से लेकर 18 वर्ष की आयु तक के बच्चे शिक्षा की प्राप्ति कर सकेंगे। शिक्षा की इस नई रूपरेखा के तहत पहले भाग में प्री स्कूल के 3 साल एवं प्राथमिक स्कूल की पहली और दूसरी कक्षा, कक्षा 3 से 5, कक्षा 6 से 8 और कक्षा 9 से 12 को शामिल किया गया है। विद्यार्थियों का समग्र विकास करने के लिए यह रूपरेखा तैयार की गई है।

स्कूल कॉन्प्लेक्स/कलस्टर के माध्यम से कुशल संसाधन

National Education Policy का सुचारू रूप से संचालन राष्ट्रीय, राज्य, जिला, ब्लाक एवं स्कूली स्तर पर किया जाता है। इस योजना के कार्यान्वयन में स्कूल अपनी सबसे अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इस पॉलिसी के बारे में स्कूली स्तर पर सभी शिक्षकों को ज्ञान होना चाहिए। क्योंकि शिक्षकों के द्वारा ही इस योजना का संचालन अंतिम स्तर पर किया जाएगा। इस योजना के कार्यान्वयन से संबंधित जानकारी शिक्षकों को स्कूल मैनेजमेंट द्वारा उपलब्ध करवाई जाएगी। ताकि योजना का कार्यान्वयन समय से किया जा सके। साथ ही सरकार द्वारा सभी राज्य एवं जिलों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वह बाल भवन स्थापित करें। ताकि बच्चे कला, खेल एवं कैरियर से संबंधित गतिविधियों में भाग ले सकें‌ और अपनी प्रतिभा में भविष्य के लिए आत्मनिर्भर एवं सशक्त बन सके।

विशेष प्रतिभा वाले और मेधावी विद्यार्थियों को प्रोत्साहन

नई शिक्षा नीति के तहत छात्रों की प्रतिभाओं की पहचान की जाएंगी। साथ ही उनकी प्रतिभा को बढ़ावा दिया जाएगा और उनका विकास भी किया जाएगा। इसके अलावा छात्रों को भी अपनी प्रतिभा एवं रुचि की पहचान करने में भी सहायता प्रदान की जाएगी। शिक्षकों द्वारा बच्चों को मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन दिया जाएगा। इस योजना के माध्यम से बच्चों की प्रतिभा को और निखारा जाएगा।

सभी छात्रों के लिए शिक्षा सुनिश्चित करना: इस योजना को शुरू करने का मुख्य उद्देश्य देश के सभी छात्रों तक शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना है। क्योंकि शिक्षा प्राप्त करना सभी बच्चों का बुनियादी अधिकार है। इसलिए सरकार द्वारा 14 साल तक की आयु के बच्चों को निशुल्क शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान निर्धारित किया गया है।। ताकि उन्हें सामाजिक न्याय एवं समानता प्राप्त हो सके। सरकार द्वारा लड़कियों की शिक्षा पर ज्यादा महत्व दिया जा रहा है। इस समय ट्रांसजेंडर छात्रों को भी शिक्षा प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।

स्कूल कॉन्प्लेक्स/कलस्टर के माध्यम से कुशल संसाधन

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी का सुचारू रूप से संचालन राष्ट्रीय, राज्य, जिला, ब्लाक एवं स्कूली स्तर पर किया जाता है। इस योजना के कार्यान्वयन में स्कूल अपनी सबसे अधिक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए इस पॉलिसी के बारे में स्कूली स्तर पर सभी शिक्षकों को ज्ञान होना चाहिए। क्योंकि शिक्षकों के द्वारा ही इस योजना का संचालन अंतिम स्तर पर किया जाएगा। इस योजना के कार्यान्वयन से संबंधित जानकारी शिक्षकों को स्कूल मैनेजमेंट द्वारा उपलब्ध करवाई जाएगी। ताकि योजना का कार्यान्वयन समय से किया जा सके। साथ ही सरकार द्वारा सभी राज्य एवं जिलों को प्रोत्साहित किया जाएगा कि वह बाल भवन स्थापित करें। ताकि बच्चे कला, खेल एवं कैरियर से संबंधित गतिविधियों में भाग ले सकें‌ और अपनी प्रतिभा में भविष्य के लिए आत्मनिर्भर एवं सशक्त बन सके।

स्कूली शिक्षा के लिए मानक निर्धारण

National Education Policy के तहत स्कूलों द्वारा स्कूली शिक्षा नियामक प्रणाली का निर्माण किया जाएगा। इस प्रणाली के द्वारा शैक्षिक परिणाम में सुधार लाने का प्रयास किया जाएगा। इस प्रणाली के माध्यम से नेशनल एजुकेशन पॉलिसी को लागू करने के तरीके पर भी अध्ययन किया जाएगा और पॉलिसी लागू करने के बाद उसका मूल्यांकन किया जाएगा।

National Education Policy के तहत उच्चतर शिक्षा के कुछ आवश्यक घटक

सम्रग एवं बहूविषयक शिक्षा

नई शिक्षा नीति में छात्रों को सम्रग एवं बहुविषयक शिक्षा प्रदान करने का भी प्रावधान रखा गया है। ताकि छात्रों का संपूर्ण एवं सम्रग विकास किया जा सके। जिसके लिए लचीले पाठ्यक्रमों को विकसित किया जाएगा। एग्री कार्यक्रम की अवधि में भी आवश्यकतानुसार बदलाव किए जाएंगे। साथ ही बच्चों को उनकी रूचि के अनुसार शिक्षा प्राप्त करने का विकल्प प्रदान किया जाएगा।

गुणवत्तापूर्ण विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय

आज के समय में देश की बेरोजगारी दर घटाने के लिए उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना अत्यधिक आवश्यक है। इसलिए विश्वविद्यालयों की शिक्षा प्रणाली में गुणवत्ता लाने के लिए नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के माध्यम से अनेक प्रकार के प्रयास किए जाएंगे। ताकि युवाओं का सम्रग विकास किया जा सके। बहु विषयक विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालयों के माध्यम से नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत बच्चों को उच्चतर शिक्षा प्रदान की जाएगी।

व्यवसायिक शिक्षा:

इस समय देश में व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों की संख्या सबसे अधिक कम है। इनमें से 18 से लेकर 24 वर्ष की आयु के लगभग 5% से भी कम छात्र औपचारिक व्यवसायिक शिक्षा प्राप्त करते हैं। लेकिन अन्य देशों में यह संख्या 50% से 75% तक की है। इसलिए अब नई शिक्षा नीति के तहत व्यवसायिक शिक्षा को बढ़ावा देने का प्रावधान रखा गया है। हमारे देश में व्यवसायिक शिक्षा को कम महत्व की शिक्षा माना जाता है। लोगों की इसी धारणा को दूर करने के लिए इस पॉलिसी के माध्यम से छात्रों को अधिक से अधिक व्यवसायिक शिक्षा का ज्ञान प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा। सन् 2025 तक स्कूल और उच्च शिक्षा प्रणाली के द्वारा कम से कम 50% युवाओं को बेहतर शिक्षा प्रदान करने का लक्ष्य निर्धारित भी किया गया है।

संस्थागत पुनगठन एवं समेकन

इस योजना का एक मुख्य लक्ष्य है यह भी है कि उच्च शिक्षण संस्थानों को बड़े और बहू विषयक विश्वविद्यालयों कॉलेज आदि में स्थानांतरण करना है।सभी उच्च शिक्षा संस्थानों का लक्ष्य लगभग 3000 या इससे अधिक छात्रों का उत्थान करना होगा। सार्वजनिक एवं निजी दोनों संस्थानों का विकास इस योजना के माध्यम से किया जाएगा। इसके अलावा निष्पक्ष प्रणाली का सहारा लेकर छात्रों का सामाजिक और मानसिक विकास किया जाएगा।

अध्यापक शिक्षा

छात्रों को बेहतर शिक्षा प्रदान करने के लिए एनसीपी द्वारा शिक्षकों की सक्षम टीम का निर्माण करना अत्यधिक  जोर दिया जा रहा है। शिक्षकों को बुनियादी शिक्षा से लेकर उच्चतर शिक्षा तक तैयार किया जाएगा। शिक्षकों को बहू विषयक दृष्टिकोण एवं ज्ञान की आवश्यकता के साथ-साथ अभ्यास भी करवाया जाएगा।शिक्षण प्रक्रिया के साथ-साथ भारतीय मूल्य, भाषा, ज्ञान, लोकाचार, परंपराओं, जनजाति परंपराओं, के प्रति शिक्षकों को जागरूक भी किया जाएगा।

सीखने के लिए सर्वोत्तम वातावरण और छात्रों का सहयोग

आज के समय में छात्रों को कुछ अन्य क्षमताएं जैसे-फिटनेस, नैतिक मूल्य का आधार एवं अच्छा स्वास्थ्य आदि के बारे में सिखाना भी अत्यधिक आवश्यक है। छात्रों को प्रभावी ढंग से शिक्षा प्राप्त करने के लिए उपायुक्त पाठ्यक्रम, आकर्षक शिक्षण, निरंतर रचनात्मक मूल्यांकन और छात्रों का पर्याप्त सहयोग होना चाहिए। अब यह सभी चीजें National Education Policy में जोड़ी गई है। जिससे छात्र गुणवत्तापूर्ण तरीके से अपनी पढ़ाई कर सकें। इस पॉलिसी के तहत शिक्षा का अंतरराष्ट्रीयकरण कर किया जाएगा। ताकि भारत में पढ़ने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों की संख्या में बढ़ोतरी हो और भारत के छात्रों को विदेशी संस्थानों में शोध करने का मौका प्राप्त हो सके। इसके अलावा इस पॉलिसी के द्वारा छात्रों को छात्रवृत्ति उपलब्ध करवाने का भी प्रावधान रखा गया है।

छात्रों को नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत प्रदान की जाने वाली सुविधाएं

  • छात्रों को लंच बॉक्स ना लाना पड़े इसके लिए विश्वविद्यालयों को यह भी सुनिश्चित करना होगा कि मिड-डे-मील की गुणवत्ता बेहतर हो। इसके अलावा पानी की व्यवस्था भी बेहतर तरीके से उपलब्ध होनी चाहिए। ताकि छात्रों को वाटर बोतल ना लाने की आवश्यकता हो। इन सभी सुविधाओं के कारण ही स्कूल के बैग का साइज कम हो पाएगा।
  • नई शिक्षा नीति के तहत बच्चों के होमवर्क पर भी अत्यधिक ध्यान दिया जाएगा। इसलिए अब इस योजना के तहत तीसरी क्लास तक के बच्चों को होमवर्क नहीं दिया जाएगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि पहली और दूसरी कक्षा के छात्र बहुत छोटे होते हैं और उनमें बैठने की इतनी क्षमता नहीं होती है।
  • तीसरी, चौथी और पांचवी कक्षा के छात्रों को केवल 2 घंटे का होमवर्क दिया जाएगा। छठीं से लेकर आठवीं तक के छात्रों को प्रतिदिन 1 घंटे का होमवर्क दिया जाएगा। नवीं से लेकर बारहवीं कक्षा तक के छात्रों को प्रति दिन 2 घंटे का होमवर्क दिया जाएगा।
  • इसके अलावा विद्यालयों में छात्रों को प्रदान की जाने वाली क्लासेस का टाइम टेबल इस तरह से बनाया जाएगा कि बच्चों के बैग का वजन कम हो सके। विद्यालयों द्वारा किताबों का चयन करते समय उनके वजन पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा और स्कूलों में लगाई गई सभी किताबों का वजन उनके ऊपर पब्लिशर्स द्वारा प्रिंट करवाया जाएगा।

नई शिक्षा नीति का कार्यान्वयन पूर्ण देश में जून से लागू

राष्ट्रीय शिक्षा नीति कार्यान्वयन प्रक्रिया जून 2021 से प्रगति की निगरानी के लिए शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की जाएगी। सूत्रों के मुताबिक बताया गया है कि कॉलेज और विश्वविद्यालय स्तर के नीतिगत बदलाव को लागू करने पर जोर दिया जा रहा है। मंत्रालय ने 181 कार्यों की पहचान की है जिन्हें नई शिक्षा नीति द्वारा पूरा किया जाएगा। इन कार्यों को कर्नाटक उत्तर प्रदेश महाराष्ट्र और गोवा जैसे राज्यों में सरकारों ने टास्क फोर्स का गठन किया है। कर्नाटक के टास्क फोर्स ने अपनी रिपोर्ट जारी की है जहां सुझाव दिया गया है कि इस नीति को 2021 में लागू किया जाएगा। परंतु अभी तक राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा इन सिफारिशों पर अपनी सलाह नहीं दी गई है।

इंजीनियरिंग डिग्री में एडमिशन के लिए अब अनिवार्य नहीं पीसीएम और पीसीबी

जैसे कि हम सब जानते हैं की परंपरागत रूप से पीसीएम और पीसीबी विशेष संयोजन पूरे भारत में इंजीनियरिंग संस्थानों में यूजी कार्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए अनिवार्य हैं परंतु 2021-22 के शैक्षणिक वर्ष से इंजीनियरिंग उम्मीदवारों को अब आगे एडमिशन लेने के लिए फिजिक्स केमिस्ट्री मैथ्स और बायोलॉजी लेना अनिवार्य नहीं है। इसकी घोषणा अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद द्वारा अनुमोदन प्रक्रिया हैंडबुक में कहा गया है कि छात्र कंप्यूटर साइंस बायो टेक्नोलॉजी एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग ग्रैफिक्स से किसी भी तीन विषयों के साथ अपनी 12वीं की कक्षा पूर्ण कर स्नातक इंजीनियरिंग कार्यक्रम में आवेदन कर सकते हैं। इसीलिए अब विज्ञान के छात्रों को इतिहास साहित्य को एक विषय के रूप में लेने की अनुमति होगी और कला के छात्र एक विषय के रूप में भौतिक क्या गणित ले सकते हैं ‌

National Education Policy के अंतर्गत STARS योजना

केंद्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत एक नई STARS योजना के कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी है। इसका लक्ष्य है कि राज्यों को मजबूत बनाने के लिए शिक्षण अधिगम और परिणाम प्रदान किया जाए। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 5718 करोड़ परियोजना लागत के साथ स्टार्स परियोजना शुरू करने का निर्णय लिया है। इस राशि में से 3700 करोड रुपए विश्व बैंक द्वारा दिए जाएंगे। इस परियोजना को नई शिक्षा नीति की नई अवधारणा को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू किया जाएगा। इसका कार्यान्वयन शिक्षा मंत्रालय के स्कूली विभाग द्वारा किया जाएगा। इसमें एक स्वतंत्र और स्वायत्त संस्थान के रूप में एक राष्ट्रीय मूल्यांकन केंद्र परख की स्थापना शामिल होगी।

NEP 2020 के तहत STARS योजना 2022 में शामिल होने वाले राज्य

स्टार्स योजना के तहत चिन्हित राज्यों को शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए विभिन्न हस्तक्षेपों के ने समर्थन दिया जाएगा। स्टार्स योजना में छह भारतीय राज्यों को शामिल किया गया है जो कि कुछ इस प्रकार है

  • हिमाचल प्रदेश
  • राजस्थान
  • महाराष्ट्र
  • मध्य प्रदेश
  • केरला
  • उड़ीसा

STARS योजना आत्मनिर्भर भारत अभियान का हिस्सा

स्टार स्कीम का उद्देश्य आत्मनिर्भर भारत अभियान के एक हिस्से के रूप में विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करना है जो कि कुछ इस प्रकार हैं

  • पीएम ई विद्या
  • फाउंडेशन लिटरेसी एंड न्यूमेरसी मिशन
  • बचपन की देखभाल और शिक्षा के लिए राष्ट्रीय पाठ्यक्रम और शैक्षणिक ढांचा

नई शिक्षा नीति का कार्यान्वयन- National Education Policy

जैसे कि हम सब जानते हैं 1968 और 1992 मैं जारी की गई शिक्षा नीति के बाद यह तीसरी राष्ट्रीय शिक्षा नीति है जो 2020 मैं लागू की गई है। तथा शिक्षा मंत्री द्वारा नई शिक्षा नीति के कार्यान्वयन के लिए भी घोषणा जारी कर दी गई है इस नीति ने वर्तमान शिक्षा प्रणाली में कई महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं जैसे शिक्षा के विभिन्न धाराओं के बीच पारंपरिक रेखाओं को हटाना, नई पीढ़ी के छात्रों को अधिक शिक्षा समग्र प्रदान करना आदि। यह शिक्षा नीति आने वाले दो दशकों के लिए डिजाइन की गई है इसीलिए विभिन्न सिफारिशों को लागू करने के लिए अलग-अलग समय सीमाएं निर्धारित की गई है एक यही वजह है जिस कारण नई शिक्षा नीति को चरणों में लागू किया किया जा रहा है।

National Education Policy के अंतर्गत गतिविधियों का कार्यान्वयन

  • नई शिक्षा नीति के अनुसार शिक्षकों के अनिवार्य व्यवसायिक विकास को 50 घंटे से अधिक समय तक किया जाएगा और इसके लिए सरकार के दीक्षा प्लेटफार्म पर 4 से 5 घंटे के 18 मॉडल लांच किए गए हैं ताकि इन सर्विस ट्रेनिंग आयोजित की जा सके।
  • फाऊंडेशनल लिटरेसी एंड न्यूमरस इस मिशन के साथ-साथ सरकार द्वारा राष्ट्रीय मिशन की स्थापना के लिए मंजूरी दे दी है।
  • तथा ई लर्निंग का विस्तार करने के लिए सरकार द्वारा शिक्षा प्लेटफार्म तैयार किया गया है जिससे पाठ्यक्रम से जुड़ी सामग्री की अधिक मात्रा लोगों तक पहुंचाई जाएगी।
  • इसके साथ-साथ विभाग ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और कल्याण के महत्व को भी ध्यान में रखा है और व्यक्ति छात्रों को भावनात्मक सहायता के साथ-साथ परामर्श प्रदान करने के लिए मनो दर्पण नामक एक पहल शुरू की है। इसके साथ राष्ट्रीय टोल फ्री नंबर इंटरएक्टिव ऑनलाइन चैट विकल्प और राष्ट्रीय स्तर की निर्देशिका और काउंसलर के डेटाबेस विकसित किए हैं।
  • NCERT द्वारा भारतीय संकेतिक भाषा अनुसंधान और प्रशिक्षण केंद्र के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं ताकि स्कूल शिक्षा के लिए एक भारतीय संकेतिक भाषा का निर्माण किया जा सके।
  • सीबीएसई परीक्षा में सुधार के लिए कुछ आवश्यक चरण उठाए गए हैं और इस सुधार को 2021 में लागू किया जाएगा। शैक्षणिक सत्र 2021 और 22 से जैसे मैथ और हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत दो स्तरों में पेश किए जाएंगे। इसके अलावा कक्षा 10वीं और 12वीं के लिए बोर्ड परीक्षा में योग्यता आधारित प्रश्नों में वृद्धि जारी रहेगी जिन्हें पहले ही पेश किया जा चुका है और प्रति वर्ष 10% की वृद्धि की जा रही है।

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राष्ट्रीय शिक्षा नीति नई अपडेट

स्कूली शिक्षा को एक ही प्लेटफ़ार्म पर रखने वाली राष्ट्रीय शिक्षा नीति ने प्री प्राइमरी से जुड़ी एक नई अपडेट दी है। शिक्षा मंत्रालय ने प्री प्राइमरी स्कूलों की शिक्षा को नीति में जोड़ने की एक नई पहल की है। अब कोरोनावायरस संक्रमण के चलते हुए शिक्षा नीति द्वारा प्री प्राइमरी को भी ऑनलाइन पढ़ाई से जोड़ा जाएगा।

  • स्कूलों में राज्य के साथ मिलकर राष्ट्रीय शिक्षा नीति के केंद्र शिक्षा मंत्रालय ने,
  • मंगलवार को एक उच्च स्तरीय बैठक में समग्र शिक्षा के नियमों में बदलाव को लेकर चर्चा की।
  • इन बदलाव पर अभी कोई सहमति नहीं दी गई है लेकिन मंत्रालय ने इसे जल्द ही सीबीएसई एनसीईआरटी और
  • एनसीटीआई के साथ उच्च स्तरीय बैठक करने की योजना बनाई है।
  • और साथ-साथ राज्य के बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाई के लिए
  • अब ब्लॉक स्तर की टीम में ऑनलाइन पढ़ाई पर पूरी तरह से नजर रखेंगे
  • जिससे उनकी शिक्षा में आई कमी को तुरंत जांचा जाएगा और उसमें सुधार किया जाएगा।

National Education Policy- NEP 2023

आपको बता दें कि शिक्षा व्यवस्था में शिक्षक पात्रता परीक्षा के स्वरूप में भी बदलाव किए गए हैं अब तक टीआईटी परीक्षा दो हिस्सों में बांटी गई थी परंतु अब स्कूली शिक्षा व्यवस्था स्ट्रक्चर चार हिस्सों में बांट दिया गया है पहला फाउंडेशन, दूसरा प्रोपराइटरी, तीसरा मिडल तथा चौथा सेकेंडरी। और इसी स्ट्रक्चर के आधार पर टीआईटी पैटर्न को भी सेट किया गया है। और शिक्षकों के भर्ती के समय टीआईटी या संबंधित सब्जेक्ट में एनडीए टेस्ट स्कोर भी जाना जाएगा। सभी विषयों की परीक्षा और एक कॉमन एप्टिट्यूड टेस्ट का आयोजन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी के द्वारा किया जाएगा।

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) का उद्देश्य

National Education Policy का मुख्य उद्देश्य है कि भारत को वैश्विक स्तर पर शैक्षिक रूप से महाशक्ति बनाया जाए और भारत में शिक्षा का सार्वभौमिकरण कर शिक्षा की गुणवत्ता को उच्च किया जाए। इस नई पॉलिसी से पुरानी एजुकेशन पॉलिसी को बदला जाएगा जिससे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार आएगा और बच्चे भी अच्छी शिक्षा प्राप्त करके अपना जीवन उज्जवल बना पाएंगे।इस योजना का मुख्य उद्देश्य है कि बच्चों तकनीकी तथा रचनात्मक के साथ-साथ शिक्षा का महत्व समझाना तथा उन्हें अपने आने वाले कल के लिए  पूर्ण रूप से तैयार करना जिससे  उनके अंदर सशक्तिकरण व  मनोबल बना रहे 

National Education Policy
National Education Policy

छात्र को वित्तीय सहायता दी जाएगी

इस पॉलिसी के अंतर्गत राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल का विस्तार भी किया गया है इस पोर्टल के माध्यम से बच्चों को वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी ताकि वह पढ़ाई के लिए प्रोत्साहित हों और उनकी प्रगति को। इस पॉलिसी के माध्यम से प्राइवेट एजुकेशन इंस्टीट्यूशन को भी प्रोत्साहित किया जाएगा ताकि वह अपने अंतरित पढ़ने वाले बच्चों को छात्रवृत्ति प्रदान करें। इससे बच्चों के दिलों में पढ़ाई करने के लिए इच्छा बढ़ेगी और वह प्रगति की ओर बढ़ेंगे

आईआईटी बहू विषयक संस्थान का निर्माण किया जाएगा

इस पॉलिसी के तहत आईआईटी जैसे इंजीनियरिंग संस्थानों का भी निर्माण किया जाएगा ताकि बच्चे आईआईटी बहु विषयक शिक्षा की ओर बढ़े। जिससे छात्रों को उच्च शिक्षा प्राप्त करने की इच्छा हो और अपने करियर को इंजीनियरिंग के रास्ते पर लाकर उज्जवल बनाएं

विदेशी छात्रों के लिए बनाए जाएंगे अंतरराष्ट्रीय छात्र कार्यालय

नई शिक्षक पॉलिसी के अंतर्गत कम लागत पर अच्छी शिक्षा प्रदान करने बाला एक वैश्विक अध्ययन स्थल के रूप में भारत को बढ़ावा दिया जाएगा जिससे विदेशी छात्रों को मेजबानी करने के लिए अंतरराष्ट्रीय छात्र कार्यालय की स्थापना की जाएगी

नेशनल रिसर्च फाउंडेशन का निर्माण होगा

इस पॉलिसी के तहत नेशनल रिसर्च फाउंडेशन की स्थापना भी की जाएगी जिसके माध्यम से शोध के संस्कृति को सक्षम बनाया जाएगा। इसकी स्थापना भारत में शोधकर्ताओं को बढ़ावा देगा और विभिन्न रिसर्च सामने आएंगी और यह हमारे देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होंगी

Education Policy
NEP

नई एजुकेशन पॉलिसी के अंतर्गत बोर्ड का महत्व

नई एजुकेशन पॉलिसी के तहत बोर्ड का महत्व कम गया है जिससे बच्चों को होने वाले तनाव में कमी आए और इस बोर्ड परीक्षाओं को दो भागों में आयोजित किया जाएगा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी द्वारा नई शिक्षा नीति को दिया गया सहयोग

  • हमारे देश के प्रिय प्रधानमंत्री द्वारा देश को संबोधित करते हुए National Education Policy के ऊपर कुछ चर्चा किए गए जो कि इस प्रकार हैं
  • प्रधानमंत्री द्वारा कहा गया कि नई शिक्षा नीति (NEP) भारत का आधार बनेगी।
  • यह नई नीति छात्रों को ग्लोबल सिटीजन बनाई थी और इसी के साथ
  • यह नई शिक्षा नीति उन्हें अपनी सभ्यता से भी जोडे़ रखेगी।
  • इस नीति के माध्यम से छात्र अपने जुनून का पालन कर पाएंगे।
  • प्रधानमंत्री जी द्वारा कहा गया कि छात्रों को अपने इंटरेस्ट एबिलिटी और डिमांड की मैपिंग करनी चाहिए।
  • छात्रों को क्रिटिकल थिंकिंग को डिवेलप करने की आवश्यकता है।
  • प्रधानमंत्री द्वारा कहा गया कि हम ऐसे युग में प्रवेश करने जा रहे हैं जिसमें इंसान किसी एक प्रोफेशन कोअपनी पूरी जिंदगी फॉलो नहीं करेगा।
  • प्रधानमंत्री ने कहा कि अब तक एजुकेशन पॉलिसी व्हाट यू थिंक पर फोकस करती थी लेकिन अब यह नीति हाउ टो थिंक पर फोकस करेगी।
  • इस इंप्लीमेंट करने के लिए शिक्षा विभाग से जुड़े लोगों का बहुत बड़ा योगदान है टीचर ट्रेनिंग पर भी खास ध्यान देने के बाद की गई है।
  • प्रधानमंत्री द्वारा अपने संबोधन मैं मल्टीपल एंट्री तथा एग्जिट के बारे में भी अच्छे से समझाया
  • प्रधानमंत्री द्वारा कहा गया कि कक्षा 5 तक क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाए जाने का प्रावधान इस नई शिक्षा नीति में शामिल किया गया है

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) के तहत पाठ्यक्रम

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत पाठ्यक्रम में भी कमी की गई है, अब पाठ्यक्रम उतना कर दिया गया है जितना बच्चों के लिए अनिवार्य है। इस पाठ्यक्रम को कम करने का लक्ष्य था कि क्रिटिकल थिंकिंग पर ज्यादा ध्यान दिया जाए और टेक्नोलॉजी के माध्यम से जैसे कि टीवी, चैनल, ऑनलाइन बुक एप यानी ई लर्निंग को बढ़ावा दिया जाए।

नई शिक्षा नीति (NEP) की मुख्य विशेषताएं

  • नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के अंतर्गत शिक्षा का सार्वभौमीकरण किया जाएगा।
  • National Education Policy के अंतर्गत पहले 10+2 का पैटर्न फॉलो किया जाता था|
  • जिसे बदलकर अब 5+3+3+4 का पैटर्न फॉलो किया जाएगा।
  • पांचवी कक्षा तक शिक्षा मातृभाषा या फिर क्षेत्रीय भाषा में प्रदान की जाएगी।
  • छठी कक्षा में व्यवसायिक परीक्षण इंटरशिप दी जाएगी।
  • पहले साइंस कॉमर्स तथा आर्ट्स स्ट्रीम हुआ करती थी अब ऐसी कोई भी स्ट्रीम नहीं होगी|
  • छात्र अपनी इच्छा के अनुसार ही सब्जेक्ट का चयन करेंगे।
  • अब छात्रों को छठी कक्षा में ही कोडिंग सिखाई जाएगी।
  • सभी प्रकार के इ कंटेंट को क्षेत्रीय भाषा में ट्रांसलेट किया जाएगा।
  • वर्चुअल लैब का भी निर्माण किया जाएगा
  • मानव संसाधन प्रबंधन मंत्रालय का नाम बदलकर आप शिक्षा मंत्रालय रखा गया है।

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी की मुख्य बातें

  • ग्रेजुएशन कोर्स 3 या 4 के होंगे जिसमें विभिन्न प्रकार के एग्जिट ऑप्शन होंगे|
  • जैसे के यदि कोई छात्र 1 साल ग्रेजुएशन कोर्स करता है तो उसे सर्टिफिकेट दिया जाएगा
  • 2 साल करता है तो उसे एडवांस डिप्लोमा दिया जाएगा
  • 3 साल करता है तो उसे डिग्री प्रदान की जाएगी|
  • तथा 4 साल के बाद रिसर्च के साथ बैचलर की डिग्री प्रदान की जाएगी|
  • एकेडमिक बैंक ऑफ क्रेडिट का निर्माण किया जाएगा|
  • जिसमें छात्रों द्वारा डिजिटल अकैडमी क्रेडिट विभिन्न उच्च शिक्षा संस्थानों के माध्यम से समृद्ध किया जाएगा|
  • और अंतिम डिग्री के लिए स्थानांतरित किया जाएगा।
  • ई लर्निंग पर जोर दिया जाएगा और पाठ्यपुस्तक पर निर्भरता को कम किया जाएगा।
  • पॉलिसी के तहत 2030 तक प्रत्येक जिले में एक बड़ी बहू विषयक उच्च शिक्षा संस्थान का निर्माण किया जाएगा।
  • इस नीति के तहत 2040 तक सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को बहू विषय संस्थान बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
  • शिक्षा नीति के अंतर्गत सरकारी तथा प्राइवेट शिक्षा मानव एक समान होंगे|
  • तथा दिव्यांग जनों के लिए शिक्षा में बदलाव किया जाएगा

National Service Scheme

नई शिक्षा नीति के लाभ

  • नई एजुकेशन पॉलिसी को लागू करने के लिए जीडीपी का 6 परसेंट हिस्सा खर्च किया जाएगा।
  • इस योजना के तहत भारत की अन्य प्राचीन भाषा पढ़ने का विकल्प रखा जाएगा।
  • बोर्ड परीक्षा का तनाव भी कम किया जाएगा  की छात्राओं के ऊपर कोई बोझ ना रहे।
  • पढ़ाई को आसान करने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल भी किया जाएगा।
  • एमफिल की डिग्री को खत्म किया जाएगा।
  • एक्स्ट्रा करिकुलर एक्टिविटीज को मैन सिलेबस में रखा जाएगा।
  • छात्राओं को तीन मुख्य भाषा सिखाई जाएंगी जो अपने राज्य स्तर पर निर्धारित करेंगे।
  • राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और परिषद द्वारा स्कूली शिक्षा के लिए पाठ्यक्रम रूपरेखा तैयार की जाएगी।
  • नई शिक्षा नीति लागू करने के लिए काफी सारे संस्थान स्थापित किए जाएंगे।
  • इस पॉलिसी के अंतर्गत बच्चों की पढ़ाई के साथ-साथ उनके कौशल पर ध्यान दिया जाएगा।
  • नई नीति के तहत अगर कोई छात्र किसी कोर्स को बीच में छोड़कर दूसरे कोर्स में दाखिला लेना चाहता है
  • तो उसे कुछ समय का ब्रेक दिया जाएगा ताकि वह दूसरा कोर्स ज्वाइन कर सके।

नई शिक्षा नीति (NEP) के चरण

इस नीति को कुल 4 चरणों में विभाजित किया गया है जो पहले 10+2 था उसे बदल कर 5+3+3+4 कर दिया गया है। इस नए पैटर्न में 12 साल की स्कूल शिक्षक तथा 3 साल की प्रीस्कूल शिक्षक शामिल है। न्यू शिक्षा पॉलिसी के चार चरण कुछ इस प्रकार हैं

फाउंडेशन

इस स्टेज में 3 से 8 साल तक के बच्चे को शामिल किया जाता है जिसमें 3 साल की प्री स्कूल शिक्षा होती है तथा 2 साल की स्कूल शिक्षा शामिल होती है। फाउंडेशन स्टेज के तहत भाषा कौशल और शिक्षण के विकास पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।

प्रिप्रेटरी 

इस स्टेज में 8 साल से लेकर 11 साल तक के बच्चों को शामिल किया गया है जिसमें कक्षा 3 से 5 तक के बच्चे। प्रिप्रेटरी स्टेज में भाषा और संख्यात्मक कौशल के विकास पर अधिक ध्यान दिया जाएगा।

मिडिल स्टेज

इस स्टेज में कक्षा 6 से 8 तक के बच्चों को शामिल किया गया है। तथा कक्षा 6 के बच्चों को कोडिंग की शिक्षा दी जाएगी और उन्हें व्यवसायिक परीक्षण के साथ-साथ इंटर्नशिप भी प्रदान की जाएगी।

सेकेंडरी स्टेज

इस स्टेज में 9 से 12 तक के बच्चे शामिल होंगे। पहले बच्चों को अपनी स्ट्रीम सेलेक्ट करनी पड़ती थी पर अब इसे खत्म करके बच्चे अपनी पसंद के सब्जेक्ट का चयन कर सकते हैं। जैसे कि अगर बच्चे साइंस के साथ कॉमर्स या फिर कॉमर्स के साथ आर्ट्स लेना चाहे तो उनको प्रदान की जाएगी

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी (NEP) स्ट्रीम्स

जैसे कि हम सब जानते हैं कि इस नई पॉलिसी के पहले बच्चों को अपनी स्ट्रीम्स जैसे के आर्ट्स साइंस कमर्स को चुनना पड़ता था तथा इस नई एजुकेशन पॉलिसी के अंतर्गत छात्रों को अब कोई स्कीम चुनने की आवश्यकता नहीं है आप अपनी इच्छा अनुसार कोई भी सब्जेक्ट का चयन कर सकते हैं। प्रत्येक विषय को अतिरिक्त पाठ्यक्रम ना मान के पाठ्यक्रम के रूप में देखा जाएगा और इसमें योग्य खेल नृत्य मूर्तिकला संगीत आदि भी शामिल होंगे। इसके साथ-साथ शारीरिक शिक्षा को भी पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इस नीति में वोकेशनल तथा एकेडमिक स्ट्रीम को भी अलग नहीं किया जाएगा जिससे छात्रों को दोनों क्षमताओं को विकसित करने का मौका प्राप्त होगा

B.ed होगा अब 4 साल का

नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के तहत b.ed को अब 4 साल का कर दिया गया है 2030 के अंत तक शिक्षक की न्यूनतम योग्यता 4 साल का b.ed प्रोग्राम होगी जिसके तहत अगर मानकों का पालन नहीं किया गया तो उनके खिलाफ सख्त कार्यवाही की जाएगी।

वोकेशनल पर होगा अधिक ध्यान

जैसे कि हम सब जानते हैं कि हमारे देश में वोकेशनल स्टडी करने वाले छात्र केवल 5 पर्सेंट है इसी चीज को मध्य नजर रखते हुए शिक्षा नीति द्वारा कक्षा छठी से कक्षा आठवीं तक छात्रों को वोकेशनल स्टडी करने पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। जिसमें बागवानी लकड़ी का काम मिट्टी के बर्तन बिजली का काम आदि शामिल है।

मातृभाषा तथा क्षेत्रीय भाषा में होगी शिक्षा

जैसे कि हम सब जानते हैं अगर कोई चीज हमें मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में समझाई जाए तो वह हमें ज्यादा समझ आती है इसी चीज को मद्देनजर रखते हुए नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के द्वारा और पांचवी कक्षा तक के बच्चे अपनी मातृभाषा तथा क्षेत्रीय भाषा में पढ़ने का प्रावधान किया गया है शिक्षकों को पांचवी कक्षा तक बच्चों को उनकी मातृभाषा तथा क्षेत्रीय भाषा में शिक्षा प्रदान करनी होगी और पाठ्य पुस्तकों को भी क्षेत्रीय भाषा में उपलब्ध करवाया जाएगा। अगर पाठ्य पुस्तक क्षेत्रीय भाषा में उपलब्ध नहीं हो पाए तो शिक्षक और बच्चों के बीच बातचीत क्षेत्रीय भाषा में होगी और उन्हें दो से तीन नई भाषा इच्छा अनुसार सिखाई जाएंगी

शिक्षकों की भर्ती

इस पॉलिसी के तहत यदि विभिन्न भाषाएं बोलने वाले शिक्षकों की कमी होगी तो विभिन्न भाषा बोलने वाली शिक्षकों को भर्ती किया जाएगा जिसके अंतर्गत जरूरत पड़ने पर रिटायर हुए शिक्षकों को दोबारा भी बुलाया जा सकता है।

विदेशी भाषा सिखाने का प्रयास

इस पॉलिसी के तहत अगर कोई बच्चा अपने मनपसंद भाषा सीखना चाहता है तो उसे वह भाषाएं भी सिखाने पर जोर दिया जाएगा जिसमें फ्रेंच जर्मन स्पेनिश चाइनीस जैपनीज आदि शामिल है।

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